इंडिया या भारत - एक देश दो नाम


क्या सच में देश को दो नामों कि जरूरत है ? क्या इतना काफी नहीं कि हमारा देश, हमारी मातृभूमि उसी पुकारी जाये जो नाम सदियों से चला आया है फिर यह बदलाव क्यों, देश के नाम को लेकर इतनी चर्चा क्यों ?


हमारे पुराण इसका पुख्ता सबूत पेश करते है कि सदियों से इस घरा को 'भारतवर्ष ' के नाम से ही जाना गया है। हमारे पुराणों में लिखा है 'जम्बू द्वीपे भारतखंड आर्यव्रत देशान्तर्गते' जिससे यह साफ़- साफ़ जाहिर होता है कि पुरातन समय से इस देश को भारत के नाम से ही जाना गया है।

जबकि दूसरा नाम 'इंडिया' तब से प्रचलन में आया जबसे ईस्ट इंडिया कंपनी यानि अंग्रेजो ने देश में कदम रखा और 'इंडिया' नाम से पुरे विश्व में ख्याति कि। अपने स्वार्थ व निजी आकांक्षाओं की प्राप्ति के लिए अंग्रेजों का दिया यह नाम देश कैसे अपना ले, जिसने इस देश को नुकसान पहुंचाने व लूटने के सिवाय कभी कुछ नहीं किया।

आज इसी बात पर पुरे देश में भरी चर्चा है कि, 'इंडिया नाम हटा दिया जाये और भारत नाम रख दिया जाये'।सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर क रइस बात की शुरुआत की गयी।भारतीय संविधान में ' इंडिया' और'भारत' दोनों हे नाम शामिल है।याचिका कर्ताओं का कहना है की यह हमरी गुलामी को झलकता है और यह नाम उसी की निशानी है।हम अंग्रेजों द्वारा दिए नाम को सालों से ढोते आ रहे है यह हमारी मानसिक गुलामी को दर्शाता है।अगर इस नाम को हमने आज भी नहीं हटाया तो हम मानसिकगुलामी से कभी नहीं मुक्त हो पाएंगे।इसीलिए 'इंडिया' शब्द की जगह 'भारत' या 'हिंदुस्तान' इस्तेमाल होना चाहिए।


एक पक्ष जो नहीं चाहता कि 'इंडिया' नाम संविधान से, इस देश की पहचान से हटा दीया जाये उनका मानना है की उच्च न्यायालय अपना समय जाया कर रही है सिर्फ एक नाम को लेकर, जो इतने सालों से चला आया है वह आगे भी यूं ही चलता रहेगा इसमें इतनी चर्चा क्युँ। उच्च न्यायालय को दूसरे बड़े मामलों पर ध्यान देना चाहिए।

दायर याचिका में यह दवा किया गया है की 'भारत' या 'हिंदुस्तान' शब्द हमारी राष्ट्रीयता के प्रति गौरव का भाव पैदा करते है। इस याचिका में संविधान के अनुछेद 1 संशोधन के प्रति उचित कदम उठाते हुए सरकार को 'इंडिया' शब्द हटाकर 'भारत' या 'हिन्दुस्तान' कहने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। यह याचका दिल्ली में रह रहे एक निवासी ने दायर की है और ये दवा किया की यह याचिका हमारे अतीत से हमे पूर्णतः मुक्ति दिलाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को इस दायर याचिका को स्थगित कर दिया गया। कोर्ट ने इस सुनवाई के लिए अभी तक कोई अगली तारीख भी नहीं दी है। इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायाधीश इस बोबड़े करने वाले थे पर उनके अवकाश पर होने के कारण मामले को फ़िलहाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

इतिहासिक दृष्टिकोण से इस मामले की अगर जाँच की जाये तो संविधान के निर्माण के समय जब देश के नाम पर चर्चा की गयी तो जवाहरलाल नेहरू ने कहा, हां हमारे देश का नाम भारत है और यही रहेगा पर इंडिया हटाने पर भरी नुकसान होगा। उनका कहना था की पूरी दुनिया हमे इंडिया नाम से पहचानती है और अचानक नाम में बदलाव करने से हम उत्तराधिकार की अवस्था से दूर हो जायेगा। हम एक नए देश के तौर पर जाने जाएंगे |



बोहोत से नए बदलाव करने होंगे। इसीलिए आगे इस पर धीरे धिरे बदलाव किये जयएंगे जिससे देश को अचानक कोई शती न पहुंचे। पर इस मामले पर बदलाव तो दूर की बात है आज तक कोई बात भी नहीं की गयी।

मैं नहीं जानती की देश के नाम से 'इंडिया' हटाना उचित है या नहीं पर यह हमारी मानसिक गुलामी को दर्शाता है तो यह बदलाव अनिवार्य है और अगर यह हमारी राष्ट्रीयता के प्रति गौरव का सवाल पैदा करता है तो बदलाव भी उचित है।

· सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 'इंडिया की जगह भारत के प्रयोग' पर दायर याचिका पर उच्च न्यायाधीश इस बोबड़े के अवकाश के कारण मामले को स्थगित किया। याचिकाकर्ता का मामले पर कहना है की इंडिया शब्द गुलामी को झलकता है। 'भारत' या 'हिन्दुस्तान' शब्द हमारी राष्ट्रीयता के प्रति गौरव का भाव पर पीड़ा करता है।

official Writer - अतिशा अग्रवाल

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