जलवायु परिवर्तन से हो रहे बदलावों से भविष्य में पर्यावरण पर भरी खतरा



वैश्विक महामारी और आर्थिक समस्याओं के बीच हम पर्यावरण और इसमें हो रहे लगातार बदलावों को नजरअंदाज कर रहें हैं। विश्व में रहे हो रहे जलवायु परिवर्तन से सबसे बड़ा नुक्सान आज मानव जाती को हो रहा है।


बहरहाल अभी कुछ दिनों में हमें बहुत से ऐसे दांग कर देने वाले पर्यावरण परिवर्तन दिखे। कहीं इंद्र देव का केहर है तो कहीं अग्नि देव का हर ओर त्राहि त्राहि है।


बेरूत में हुए विस्फोट ने सभी को अकस्मात ही चौकन्ना कर दिया व हिरोशिमा-नागासाकी की त्रासदी याद दिला दी। अगर ऐसे विस्फोट से इतनी हानि होती है और दूसरी तरफ ध्यान दिया जाए की अगर कभी भविष्य में विश्व युद्ध की स्थिति आयी तो बेरुत शायद उस त्रासदी का 10 प्रतिशत भी नहीं। गौर करने की बात यह है की हम अपने संरक्षण के लिए पर्यावरण के नाश की तैयारी कर रहे हैं। जिन उपकरणों को हम अपनी शांति के लिए बना रहे हैं असल में वही हमारे नाश व अशांति का कारण है। ऐसे में हम मानव जाती ही नहीं, पर्यावरण को भी गहन

शती पहुँचा रहे हैं।


बहरहाल कुछ दिनों पूर्व एक और घटना सामने आयी। आर्कटिक की बर्फ जलवायु परिवर्तन के कारण बिखर रही है। जिसकी वजह से कनाडा के एलेस्मीरे द्वीप के किनारे 80 वर्ग किमी का एक मुक्त-तैरता 'बर्फ द्वीप' बना चुका है। अगर ऐसे ही परिवर्तन होते रहे तो वैज्ञानिकों के एक संशोधन के अनुसार 80 वर्षों में विश्व के सारे ग्लेशियर समाप्त हो जाएँगे। आगामी भविष्य में यह पर्यावरण का सबसे बड़ा खतरा है। ग्लेशियर पिघलने से पृथ्वी के जलवायु संतुलन पर गहरा फर्क पड़ेगा।


इसी दौरान एक और बात सामने आयी कनाडा के समीप एक द्वीप पूरा पिघल गया है। एल्समेरे द्वीप पर बर्फ की शेल्फ ढहने का मतलब उत्तरी गोलार्ध की अंतिम ज्ञात उपकला झील का नुकसान है। इस घटना से हम अनुमान लगा सकते हैं धरती के ऊपर गर्मी बढ़ती ही जा रही है। इस बीच, ''एलेस्मेरे - मुर्रे और सीमन्स नामक एक और दो आइस कैप भी कम हो रहे हैं और इनकी 10 साल के भीतर गायब होने की पूरी संभावना है'' बोल्डर, कोलोराडो में नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर (NSIDC) के निदेशक मार्क सेरेज़ ने कहा। सेरेज़े ने कहा। अब इसी से हम पृध्वी पर ग्लोबल वार्मिंग और हमारे पर्यावरण की जलवायु स्थिति ज्ञात कर सकते हैं।


इस महामारी के दौर में लगभग सभी कुछ बंद होने से हमें यह प्रतीत हो रहा है की हमारा पर्यावरण पुनः अच्छी स्तिथि में आ रहा है। हमने दुनिया भर में वायु प्रदूषण को कम करने वाले ऑटोमोबाइल यातायात और उड़ानों में कमी के साथ पर्यावरण में सुधार देखा है। पर यह कुछ स्तर पर ठीक हो पर वाकई माने तो पर्यावरण असंतुलन दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। और इसकी वजह हम बुद्धिजीवियों की आलावा और कोई नहीं। हमें इस विषय में न की सिर्फ विचार विमर्श करना चाहिए हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए गहन चिंतन के साथ कदम उठाना जरूरी है।


Official Writer: ATISHA AGARWAL

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