नोबल शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप को नामित के मायने


नोबल शांति पुरस्कार को विश्व का सबसे बड़ा गैर शैक्षणिक पुरस्कार माना जाता है। ये अवॉर्ड अब तक महान हस्तियों को मिल चुका है जिन्होंने वैश्विक परिदृश्य में समाज में शांति और सद्भाव के प्रसार का काम किया है। 2019 का नोबल शांति पुरस्कार इथोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली को मिला था।

अब हम आते है हमारे विषय पर।

हुआ ये कि नॉर्वे के एक सांसद, क्रिश्चियन टाइब्रिंग-गजेड (Christian Tybring-Gjedde), जिन्हें धुर दक्षिणपंथी माना जाता है, उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में डोनाल्ड ट्रंप को नोबल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की घोषणा की है। उन्होंने इसके पीछे वजह डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में हुई यूएई-इजरायल शांति डील को बताया है। उन्होंने इस डील को अनोखा करार दिया है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति और विजन की भी तारीफ की।


हालांकि 2020 के लिए नामांकन की तिथि फरवरी में ही चली गई थी लेकिन ये नामांकन उनको 2021 के लिए किया गया है।

2020 राष्ट्रपति चुनाव में सहायता

राष्ट्रपति ट्रंप की छवि कभी भी एक समझदार और सुलझे हुए नेता की नहीं रही है। वो हमेशा मुंहफट ही रहे हैं जो उनका व्यक्तित्व भी है। अमेरिका के राष्ट्रपति के नाते आपसे उम्मीद की जाती है कि वो स्पष्ट तरीके से बात रखेंगे लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की कथनी और करनी में फर्क नज़र आ ही जाता है।

इस साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में नस्लभेद एक बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है और ट्रंप पर व्हाइट प्रुभुत्व को समर्थन देने के भी आरोप लगते रहे है। इस नामांकन से उनको अपनी छवि को साफ दिखाने का मौका मिलेगा जो चुनावों में उनको फायदा दे सकता है।

ट्रंप का नोबल शांति पुरस्कार के प्रति जुनून नॉर्वे के ही एक सांसद ने भी 2018 में ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के बीच हुई शीर्ष वार्ता के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप को नामित किया था। लेकिन तब यह पुरस्कार नदिया मुराद और डेनिस मुक्वागे को युद्ध क्षेत्र में यौन हिंसा को रोकने के प्रयासों के लिए दिया गया था। तब भी डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर निराशा जताई थी। ये बात उनके में और घर कर जाती है जब उनके प्रतिद्वंद्वी बराक ओबामा को उनके कार्यकाल के पहले ही वर्ष में शांति का नोबल मिल चुका है। डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा ये इच्छा ज़ाहिर की है कि उन्हें उत्तर कोरिया और सीरिया के लिए शांति का नोबल नहीं दिया गया जबकि वो इसके हकदार थे। वैसे ये बात अलग है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने आप को पीड़ित दिखाने का मौका कभी नहीं छोड़ते ।

एक सांसद द्वारा नामित किया जाना, यह एक तरीके से राजनैतिक मामला ही लगता है जब तक इसे नोबल पुरस्कार देने वाली कमेटी इसे अंतिम रूप ना दे दे। ये पुरस्कार वैसे भी 2021 भी दिया जाने वाला है और इसकी घोषणा भी अक्टूबर 2021 में होगी। इसीलिए ये नामांकन डोनाल्ड ट्रंप को मात्र चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए आगे बढ़ाया गया है। यूएई-इजरायल डील वैसे तो मध्य-पूर्व में शांति के लिए काफी महत्वपूर्ण है लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल जरूर उठेगा। जब 2020 के ही पुरस्कार की घोषणा नहीं हुई है तो 2021 को बात करना अभी बेमानी सी ही लगती है।

Writer - Himanshu Yadav

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