महाराष्ट्र सरकार व रेल मंत्रालय में विवाद : ट्रेनें उपलब्ध कैसे हों?



रेलवे द्वारा श्रमिक मजदूरों को उनके प्रदेशों तक पहुंचने के लिए लगातार पिछले एक महीने से सरकार द्वारा कारगर कदम उठाये जा रहे है। इस प्रक्रिया में सोशल डिस्टन्सिंग व अन्य सभी दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है। यह आदेश रेल मंत्रालय ने ट्वीट कर 1 मई को जारी किया ''आज ग्रह मंत्रालय ने आदेश जारी कर उन लोगों की आवाजाही की अनुमति रेल द्वारा भी दी है जो लॅकडाउन की वजह से फंसे हुए है जैसे स्टूडेंट्स, श्रमिक मजदूर, ट्यूरिस्ट्स, पिलग्रिम्स। इसके लिए सम्बंधित राज्य सरकारें उचित व्यवस्था करने व हेल्थ प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।'' - भारतीय रेल मंत्रालय। भारतीय रेल द्वारा निरंतर श्रमिक परिचालन जारी है, अब तक कुल 3840 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से करीब 52 लाख प्रवासी श्रमिकों को अपने गृह राज्य पहुँचाया जा चूका है।


रेलवे ने कारगर कदम उठाते हुए राज्य सरकारों से 16 मई को अनुरोध किया ''प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत पहुँचाने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे देश के किसी भी जिले से श्रमिक स्पेशल ट्रैन चलने को तैयार है। इसके लिए जिला कलेक्टर को फंसे हुए श्रमिकों के नाम, व उनके गंतव्य स्टेशन की लिस्ट राज्य के नोडल ऑफीसर माध्यम को करना होगा।''


राज्य सरकारों की मदद से रेलवे सभी उचित कदम उठा रही है। इसी दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने घर वापसी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया की केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक प्रवासी मजदूरों को उनके स्थानों तक भेजने के लिए कारगर मदद नहीं दी गयी। श्री उद्धव ठाकरे जी ने 24 मई को बयान जारी किया की ''हमने प्रवासी मजदूरों को घर वापस जाने के लिए प्रतिदिन 80 ट्रेनों की मांग की है, लेकिन केवल 50% की अनुमति दी जा रही है, हमारे पास अधिक पंजीकरण करने की क्षमता है।'' जिसके बाद रेल मंत्री पियूष गोयल के बार-बार अनुरोध करने पर भी महराष्ट्र सरकार ने कोई भी सूचि रेल मंत्रालय को प्रदान नहीं की। उद्धव ठाकरे के जवाब में उसी दिन सांय 7:14 पर रेल मंत्री पियूष मिश्रा ने ट्वीट कर कहा, '' उद्धव जी आशा है आप स्वस्थ्य है, आपके स्वस्थ्य के लिए शुभेच्छा। कल हम महाराष्ट्र से 125 श्रमिक स्पेशिल ट्रैन देने के लिए तैयार है। आपने बताया की आपके पास श्रमिकों की लिस्ट तैयार है। इसलिए आपसे अनुरोध है: सभी निर्धारित जानकारी जैसे कहाँ से ट्रैन चलेगी, यात्रियों की ट्रेनों के हिसाब की सूचि, उनका मेडिकल सर्टिफिकेट और कहाँ ट्रैन जानी है, यह सब सुचना अगले एक घंटे में रेलवे के महाप्रबंधक को पहुँचाने की कृपा करें, जिससे हम ट्रेनों की योजना समय पर कर सके। उम्मीद है की पहले की तरह ट्रैन स्टेशन पर आने के बाद, वापस ख़ाली ना जाने पावे। आपको आश्वस्त करना चाहूंगा की आपको जितनी ट्रेन चाहिए उपलब्ध होंगी।'' इसके बाद भी रेल मंत्री रुके नहीं उन्हीने हर घंटे महाराष्ट्र सरकार को लिस्ट उपलब्ध करने के लिए अनुरोध किये। 25 मई 2:11 बजे पियूष मिश्रा ने निराशा के साथ कहा ''महराष्ट्र से 125 ट्रेनों की सूची कहाँ है? 2 बजे तक, केवल 46 ट्रेनों की सूची प्राप्त हुई, जिनमें से 5 पश्चिम बंगाल और ओडिशा की हैं जो चक्रवात के कारण नहीं चल सकती हैं। हम 125 के लिए तैयार होने के बावजूद आज के लिए केवल 41 ट्रेनों को अधिसूचित कर रहे हैं।''



इस विषय में उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर ये भी आरोप लगाए की उन्हें 80 ट्रेनों की आवशयकता है और उन्हे सिर्फ 35 - 40 ही उपलब्ध हो रही है जबकि रेल मंत्री का बयान है की हमने मदद करने में कोई भी कमी नहीं राखी है इस विवाद से पहले हमने हर रोज 60-65 ट्रेनें रोज लगाई है पर पैसेंजर्स न होने के कारण वे वापस खली लौट गयी। 26 मई शाम 6 बजे तक 145 में से 85 ट्रेनों को चलना था, जिसमे से राज्य सरकार द्वारा यात्रियों की व्यवस्था न करने के कारण मात्र 27 ही चल पाई। उन्होंने ये भी कहा हम किसी भी वाद विवाद में नहीं पड़ना चाहते है। जब भी प्रदेश लिस्ट भेज देगा तुरंत उनकी सहायता क लिए ट्रेने रावना करा दी जाएँगी।

रेल मंत्री पियूष गोयल ने कहा, ''इन सब के बावजूद बात यहां गड़बड़ाती है की अगर महारष्ट्र सरकार लिस्टें न दे तो ट्रेने ना चलाने में रेल मंत्रालय प्रतिबद्ध है क्यूंकि प्रोटोकॉल इसी तरह से स्थापित किया गया है व बोहोत सी जानकारियाँ व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है इसीलिए रेल मंत्रालय बिना राज्य सरकार की मदद के कोई भी कदम नहीं उठा सकती। किसी भी रूप से राज्य सरकार को ही निर्णय लेन होगा अगर उनसे यह कार्य गतिवध तरीके से नहीं हो पा रहा है तो इसके लिए फिर केंद्र फोर्सेज भेज कार्य को पूरा करने में राज्य की मदद करेगी पर पहले कदम तो राज्य सरकार को ही उठाना होगा इसमे रैल मंत्रालय या फिर केंद्र कुछ नहीं कर सकता।


रेल मंत्री पियूष गोयल ने यह भी कहा की, ''ऐसे समय में किसी भी गतिविधि को ना ही राजनैतिक रंग देना चाहिए और न ही किसी विवाद में पड़ना चाहिए सभी राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार को मिलकर देश व जनता की सेवा में लग कर अपना भरपूर योगदान देना चाहिए। अभी तक किसी भी राज्य से कोई भी शिकायत नहीं है व देश भर में तीन हज़ार से ज्यादा श्रमिक स्पेशल ट्रेनें सफलतापूर्ण चलाई जा चुकी है।

इन विवादित बयानों के बीच में समाधान क्या है क्यूंकि कहीं न कहीं राज्य सरकारों और केंद्र की झड़क में श्रमिक मजदूर पीस रहा है जिसकी बस एक ही आशा है अपने गृह राज्य पहुँचने की और महाराष्ट्र जैसे राज्य में आवासी श्रमिकों की संख्या ज्यादा है। राज्य सरकारों को व्यवस्थित रूप से अनुकूल परिस्थितियों में श्रमिक मजदूरों को मदद मुहैया करना जरुरी है। रेल मंत्रालय व केंद्र सरकार की आवासी श्रमिकों के लिए इतनी सुविधाएं प्रदान करने पर भी मजदूरों को अपने राज्यों से मीलों दूर पीदल सफर करना पड़ रहा रहा है। अब यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है की ऐसे में इसे राजनैतिक रूप में लिया जा रहा है जब की विपदा में सभी को साथ चलना चाहिये।


· रेलवे द्वारा श्रमिक मजदूरों को उनके प्रदेशों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास

· अब तक कुल 3840 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से करीब 52 लाख प्रवासी श्रमिकों को अपने गृह राज्य पहुँचाया जा चूका है।

· महारष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे केंद्र सरकार पर ये आरोप, 80 ट्रेनों की आवशयकता पर सिर्फ 35 - 40 ही उपलब्ध।

· रेल मंत्री पियूष गोयल का बयान महाराष्ट्र सरकार ने लगाया गलत आरोप रेलवे हर कारगर मदद करने को है प्रतिबद्ध।

(Official writer) - अतिशा अग्रवाल

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