महिला नेता : नेतृत्व का अद्वितीय उदाहरण


नारी शक्ति की बात तो हम बोहोत करते है फिर वो एक माँ हो, फौजी हो, ग्रहणी या फिर राष्ट्र की मुख्य संचालक। आखिर पृथ्वी का संचालन एक औरत ही करती है। आज इस विपदा में जहाँ हर जगह जन हानि है, त्राहि है, हाहाकार का दृश्य है। नारी ने सिद्ध किया है की अगर वह ठान ले तो अपने प्रेम, त्याग, निर्णायकता, सत्यता से किसी भी आपदा का सामना सुदृढ़ तरिके से परिश्थिति की गंभीरता को समझ कर सकती है।

संकट के समय में सच्चे नेतृत्व का उदाहरण दिया है इन देशों की महिलाओं ने। आइसलैंड, ताइवान, जर्मनी, न्यूजीलैंड, डेनमार्क, फिनलैंड, नॉर्वे की प्रभावशाली नेताओं ने अपनी रणनीतियों और नेतृत्व से साबित किया है की मानव परिवार की रक्षा कैसे की जाये। और विपदा आये तो उसे चुनौती समझ अपने राज्य रूपी घरों में कैसे संतुलन बना कर रखा जाये। ये नेता अपने प्रभावशाली नेतृत्व से हमे सत्ता के चुनाव पर गंभीरता से विचार करने का एक वैकल्प दे रहा है।

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने बोहोत जल्दी ही परिस्थिति की गंभीरता को समझ कदम उठाने शुरू कर दिए व अपने देशवासियों को शांति से समझाया की;' यह विपदा संजीदा है और हमे इससे बड़ी गंभीरता से लड़ना होगा'। और टेस्टिंग का परीक्षण उपलभ्द सुविधाओं अनुसार शुरू कर दिया। जर्मनी में यूरोप में सबसे बड़े पैमाने पर कोरोनावायरस परीक्षण कार्यक्रम की देखरेख की गई, प्रत्येक सप्ताह करीब 350,000 परीक्षणों का आयोजन किया गया जिससे वायरस का जल्द से जल्द पता लगाने पर रोगियों को क्वारंटाइन किया जा सके व उनके इलाज की सुविधाएं प्रभावी रूप से आरंभ की जाये।

न्यूज़ीलैंड की प्रधान मंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने इस महामारी की संजीदगी को समझते हुए शुरवाती कार्यवाही में पर्यटन पर प्रतिबंद लगाए व पूरे देश में एक महीने का लॉकडाउन लागू किया। स्पष्टता और निर्णायकता ने न्यूजीलैंड को बड़े पैमाने पर इस तूफान से बचा कर रखा है। अप्रैल के मध्य तक उन्हें केवल चार मौतों का सामना करना पड़ा।


अब लगभग 24 मिलियन लोगों का लोकतंत्र ताइवान ही ले लो जिसे बीजिंग द्वारा अपने क्षेत्र के रूप में दावा किया जाता है इसलिए इसे महामारी से अत्यधिक असुरक्षित होना चाहिए था। लेकिन जब ताइवान के राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन को पिछले वर्ष दिसंबर में वुहान के नागरिकों के संक्रमित महामारी के बारे में सुचना प्राप्त हुई तो उन्होंने तुरंत वुहान से आने वाले सभी विमानों का निरीक्षण करने का आदेश दिया। जिसके बाद फेस मास्क उपकरणों का उत्पादन शुरू किया और मुख्य भूमि चीन, हांगकांग और मकाऊ से सभी उड़ानों को प्रतिबंधित किया। शुरवाती दौर में ताइवान ने केवल 393 पुष्ट संक्रमणों और छह मौतों का सामना किया। वह अब अमेरिका और यूरोप में 10 मिलियन फेस मास्क भेज रही है।

आइसलैंड केवल 360,000 लोगों के एक छोटे द्वीप देश है। यहाँ की प्रधान मंत्री कैटरीन जकोब्स्दोतिर के नेतृत्व में इस वायरस से लड़ने के लिए सभी नागरिकों को नि: शुल्क बचाव पद्दतियाँ उपलब्ध कराई जा रही है। अपनी जनसंख्या के अनुपात में आइसलैंड पाँच बार स्क्रीन टेस्ट कर चुका है, जितने दक्षिण कोरिया के लोग कर चुके हैं, इसी निरक्षण के कारण ताइवान में न ही स्कूल बंद करने की नौबत आयी न ही लोक डाउन लगाने की। साथ ही इन्होंने एक संपूर्ण ट्रैकिंग सिस्टम की स्थापना की है जिससे किसी भी गतिविधि का पहले ही निरक्षण कर लिया जाये।

फ़िनलैंड में पिछले दिसंबर में चुने जाने पर सना मारिन दुनिया की सबसे कम उम्र की नेता बनी। इसने वायरस के संकट से निपटने में प्रमुख एजेंटों के रूप में सोशल मीडिया प्रभावितों का उपयोग लिया। उन्होंने यह स्वीकार किया की हर कोई प्रेस नहीं पढ़ता है, इसीलिए वह चाहती है की हर किसी तक महामारी की सुचना पहुंचें व महामारी के प्रबंधन पर तथ्य-आधारित जानकारी फैलाने के लिए हर किसी को अपनी भूमिका निभानी होगी। यूरोप के बाकी हिस्सों की तुलना में उनके देश में कोरोनोवायरस से मृत्यु की तुलना काम है। उनकी महामारी से लड़ने के लिए तैयारी 85% थी। जिसमें 5.5 मिलियन की आबादी में केवल 59 मौतें थी।

नॉर्वे की प्रधान मंत्री, एर्ना सोलबर्ग ने अपने देश के बच्चों से सीधे बात करने के लिए टेलीविजन का उपयोग किया। उन्होंने इस नवीनतम विचार में किसी भी अडल्ट को अनुमती नहीं दी। उन्होंने देश भर के बच्चों के सवालों के जवाब दिए और मुख्य रूप से यह बताया कि डरना क्यों ठीक है। उन्होंने इस विपदा से लड़ने के लिए बच्चों को आश्वस्त किया। सच में किसे पता था की प्रेम पूर्वक भी किसी भयानक विपदा से ऐसे लड़ा जा सकता है।

आम तौर पर, जिस सहानुभूति, हिम्मत, सुदृढ़ता व देखभाल के साथ इन सभी महिला नेताओं ने परिस्थिति को अनुरूप दिशा निर्द्देश दिए है, वह सत्य ही नारी के कौशल को झलकती है। जिस तरह से इन महिलाओं ने अपने अगाथ प्रेम व सहनुभूति से भरी आवाज के साथ गुहार लगायी जो सभी को एक सूत्र में बांध गयी। कौन जानता था कि नेता इस तरह से आवाज लगा सकते हैं? क्या अब, इन महिला नेताओं की तुलना पुरुष नेताओं से हो सकती है?


इस पुरुष प्रधान समाज में आज भी संचालन व नेतृत्व में महिलाओं को कम अवसर प्राप्त होते है पर इस बात में कोई दौराहे नहीं की महिलायें किसी भी क्षेत्र में बखूबी नेतृत्व में सक्षम है और उनका कोई मुकाबला नहीं। अब दुनिया भर में बोहोत से ऐसे देश है जहाँ आज तक कोई महिला नेता पद पर विराजमान नहीं हुई। जबकि कई वर्षों के शोध से यह पता चलता है कि महिलाओं की नेतृत्व शैली अलग और फायदेमंद भी है। साथ ही बात तो यह है की, ऐसे बोहोत नेतृत्व लक्षण है जो पुरषों को महिलाओं से सीखने चाहिए व अपनी नेतृत्व शैली में ग्रहण करने चाहिए।

अब समय है, की हम इसे समझे व स्वीकृति दे धारण करें।

Official Writer - Atisha Agarwal



 
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