वैश्विक जनसंख्या अनुमान 2050


आज दुनिया कि जनसनंख्या 7.8 बिलियन हो चुकी है और पिछले 12 सालों में यह 1 बिलियन के स्तर तक बढ़ चुकी है जिसकी 60% आबादी लगभग 4.5 बिलियन एशिया की है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार अगर इसके नियंत्रण के लिए उचित कदम ना उठाये गए तो यह संख्या '2030 तक 8.5 बिलियन, 2050 तक 9.7 बिलयन और 2100 तक 11.2 बिलियन' हो जाएगी।

1950 में, संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के पांच साल बाद, दुनिया की आबादी लगभग 2.6 बिलियन लोगों की अनुमानित की गयी थी। यह 1987 में 5 बिलियन तक पहुंच गयी और 1999 में 6 बिलियन। 2017 की गणना के अनुसार यह संख्या 7.6 बिलियन थी जो की 1950 के बाद से लगभग तीन गुना हो गई है। 2050 तक दुनिया की आधी आबादी में वृद्धि सबसे ज्यादा इन दस देशों में देखी जाएगी इंडिया, पाकिस्तान, इथियोपिया, इण्डोनेशिया, मिस्र, यूगांडा, यूनाइटेड स्टेट्स, नाइजीरिया और तंज़ानिया।

अगले एक दशक में उम्र के दराज पर जनसंख्या में खासा बदलाव देखे जाएंगे, जिसमें वृद्ध आबादी के आंकड़े सबसे ज्यादा तर्ज पर हैं। बुजुर्गों की आबादी में वृद्धि मतलब 60 की उम्र के वर्ग में जीवन प्रत्याशा में बढ़ोतरी और प्रजनन दर में गिरावट। 2017 के आंकड़ों के अनुसार 60 और उससे अधिक आयु की जनसंख्या सिर्फ 13% थी जो की 2050 में 26% और 2100 में करीब विश्व की कुल आबादी की एक-तिहाई मतलब 36.7% होगी।





14 उम्र तक के बच्चों की जनसंख्या की बात की जाये तो इसकी दर में गिरावट होगी। यह वर्ग 2017 में विश्व की एक-चौथाई मतलब 25% आबादी थी जो की गिर कर 2050 में 21.3% होने की आकांक्षा है और 2100 में सिर्फ 17.7% तक अनुमानित है।

अब अगर बात मध्य आयु वर्ग 15 से 59 कि, की जाये तो इसमें भी गिरावट देखी जाएगी। किशोर व बालिक जनसंख्या जहाँ 2015 में 62% थी। वह 2050 में 57.2% से और कम होकर वर्ष 2100 में 54% तक कम हो जाएगी।


इन सभी आंकड़ों के अवलोकन से भविष्य में विश्व की जनसंख्या की एक गहन तस्वीर नज़र आती है। जहाँ उम्र के दराज

पर जनसंख्या की दरों में खासा उलट-फेर देखे जाएंगे। बालिक व शिशु की दरें कम होने का मतलब है भविष्य में लोग प्रजनन के प्रति सजग होंगे व बढ़ती जनसंख्या को बड़ी ही गंभीरता से लेंगे। विश्व जनसंख्या संभावनाएं 2019 के संशोधन के अनुसार, वैश्विक प्रजनन क्षमता 2019 में 2.5 प्रति महिला से 2050 में 2.2 तक गिरने का अनुमान है। वहीं अगर बात जीवन प्रत्याशा की जाये तो कुल मिलाकर, जीवन प्रत्याशा में महत्वपूर्ण लाभ देखे जाएंगे जो की वैश्विक स्तर पर, जीवन प्रत्याशा 2019 में 72.6 वर्ष से बढ़कर 2050 में 77.1 वर्ष होने की संभावना है।

संयुक्त राष्ट्र के द्वारा जारी सूचि के अनुसार 2050 तक भारत सबसे अधिक आबादी वाला देश होगा। जो की 2017 में 1.34 बिलियन से बढ़कर 2050 में 1.66 बिलियन तक हो जायेगा। इस सूचि में दूसरे स्थान पर है चीन जो 1.41 बिलियन से काम होकर 1.36 बिलियन की आबादी वाला देश होगा। व 2050 तक दुनिया का तीसरे सबसे अधिक आबादी वाला देश होगा नाइजीरिया जो की यूनाइटेड स्टेट्स से आगे निकल जाएगा व 190.89 मिलियन से 410.64 मिलियन की आबादी का होगा।

जनसंख्या अनुमान 2050 और 2100 जहाँ बहुत से स्तरों व दरों में खासा राहत देता है वहीं कुल वैश्विक जनसंख्या के प्रत्यक्ष आंकड़ों से गहन चिंता में विलीन करता है। ऐसे में विश्व परिसद, सरकारों, उच्च स्तरीय बैठकों व उच्च संस्थानों को जनसंख्या के प्रति जल्द से जल्द कदम उठाने व सख्त प्रजनन संबंधी दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्यकता है। साथ ही लोगों को सही मार्गदर्शन व परामर्श देने की जरूरत है।

Official Writer - Atisha Agarwal



 
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