हरियाली तीज



विभिन्ता में एकता को दर्शाते वर्षपरांत पुरे भारतवर्ष में अनेकों त्योंहार मनाये जाते हैं। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम विभिन्न जातियों के विभिन्न त्योंहारों की रौनक जैसे भारत का अंतरंग भाग है। या यूँ कहलो सदियों से इन्हीं त्योंहारों ने भारत की अस्मिता को जीवित रखा है व संस्कृतिक विरासत के रूप में संजोय रखा है। वर्ष की शुरुवात से आखिरी मास तक इन सभी त्योंहारों की धूम-धाम रहती है। हर मास अपने रंगों में ढले, मौलिकता व महत्व लिए त्योंहारों से परिपूर्ण है।


पर सावन के त्योंहारों ने सभी के दिलों में खासा जगह बना रखी है। सावन के त्योंहार खुशहालता, प्रेम और सौंदर्य का प्रतिक है। जैसे हर जगह नवीन उत्पत्ति की जगमगाहट रहती है व भक्ति, उल्लास और प्रेम से सभी जीवों का प्रकृति के साथ अगाध संबंध बन जाता है। और इसी अगाध प्रेम को त्योंहारों के रूप में मनाया जाता है। कभी शिव भक्ति में लीन सावन के सोमवार व शिवरात्रि, तो कभी भाई-बहन का रक्षा व प्रेम का त्योंहार रक्षाबंधन। तो सौंदर्य परिपूर्ण हरियाली तीज।



हरियाली तीज प्रेम व भक्ति का त्योंहार है। शुक्ल पक्ष की तृतीय को सावन मास में हरियाली तीज का उत्सव मनाया जाता है। श्रावण मास का यह त्योंहार शिव पुराण के अनुसार शिव-पार्वती के पुनर्मिलन का शुभ उपलक्ष माना जाता है। वर्षों की तपस्या व विरह अग्नि के बाद सावन में पार्वती माता ने भोलेनाथ को पति रूप में प्राप्त किया था।


इसके पीछे की कहानी यह है जब पार्वती माता अपने पूर्व जन्मों को स्मरण करने में असफल रहीं तो शिवजी ने उन्हें तीज की कथा सुनते हुए कहा की पार्वती तुमने मुझे पति रूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया और 108वें जन्म में तुम हिमालय की पुत्री कहलायी। तुमने मुझे प्राप्त करने के लिए अथाह तपस्या की। तुमसे प्रसन्न भगवान विष्णु ने नारद मुनि के हाथों विवाह का प्रस्ताव हिमालय को भेजा। हिमालय ने प्रसन्नता पूर्वक विवाह प्रस्ताव स्वीकार कर विवाह की तैयारियाँ शुरू करवा दी। वहाँ जब तुम्हें इस बात की खबर हुई तुम निराशा पूर्ण दशा में जंगल में एक गुफा में मेरी आराधना करने लगी। मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्ना हुआ और तुम्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। जब हिमालय तुम्हारी खोज में गुफा में आ पहुंचे तुमने वापस जाने के लिए हमारे विवाह की शर्त राखी। हिमालय ने शर्त स्वीकार की व श्रावण माह की तृतीय को विधि-विधान से हमारा विवाह रचाया गया। तभी से श्रावण तीज पर आराधना से हर कन्या को अपने मनवांछित जीवनसाथी की कामना पूर्ति का वरदान प्राप्त है।



हरयाली तीज पर सभी विवाहित महिलायें अपने सुहाग के लिए व्रत रखती हैं व पूजा करती हैं। कुंवारी लड़कियाँ अच्छे वर की कामना के लिए व्रत व पूजा करती हैं। इस त्योंहार का महत्त्व उत्तर भारत में ज्यादा है व अधिक श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। सावन के इस पर्व पर महिलाएं श्रृंगार करती हैं, नृत्य करती हैं, खेल खेलती हैं व व्रत रखती है। तीज के पहले दिन सिंजारा मनाया जाता है जब लड़की के मायके से श्रृंगार व मिठाइयाँ ससुराल भेजी जाती है। व इसी दिन महिलायें श्रृंगार करती हैं जैसे मेहँदी लगाना तीज की तैयारियाँ करना, आदि। नव-विवाहित लड़की के लिए यह तीज बहुत महत्त्वपूर्ण होती है। वह मायके व ससुराल दोनों तरफ के प्यार, स्नेह व आशीर्वाद को प्राप्त कर अपने वैवाहिक जीवन को सफल व प्रसन्नचित बनाने का प्रण लेती है। व जीवन को हर्ष- उल्लास से भरने का पूरा प्रयत्न्न करती है।


अगर बात पहनने ओढ़ने की करें तो इस दिन हरे रंग व लहरिये का बहुत महत्त्व है। जब सावन के प्राकृतिक सौंदर्य में हर जगह हरयाली होती है तो हरे रंग का महत्त्व तो अपने आप मन में उत्तेजित हो ही जाता है। इसी कारण इस उपलक्ष का नाम हरियाली तीज पड़ा। महिलाएं इस दिन हरें कपड़े, हरी चुड़ी, हरी चुनरी, हरा लहरिया पहनती हैं। इस पर्व पर सखी सहेलियों के साथ झूला-झूलने का व खेल ठिठोलियाँ करने का अपना एक अलग महत्त्व है।



माना जाता है की हरयाली तीज सुख, समृद्धि व आनंद का प्रतिक है व महिलाओं को अपने जीवन को खुशियों से भरने का मौका देती है। इस दिन महिलायें अपने दैनिक जीवन की गतिविधियों को एक दिन का विराम देकर स्वयं के लिए समय निकलती हैं। एक दिन के लिए अपने पारिवारिक व सामाजिक कर्तव्यों को ठहराव दे वह अपने अंतः मन से जीवन निर्वाह करती हैं। व सभी कर्तव्यों जिम्मेदारियों से परे स्वयं के लिए जीती हैं।

सच में हरियाली तीज का त्योंहार जहाँ एक ओर सुहागन के सुहाग का प्रतिक है भक्ति-शक्ति की परिकाष्ठा है तो दूसरी ओर अपने खुशहाल चित्त व अन्तः मन की प्रसन्नता का एक सुनहरा मौका है। शिव-पार्वती रूपी हर जोड़े के प्रेम व गठबंधन के प्रतिक व पार्वती रूपी हर महिला की खुशहाल जिंदगानी का अभूतपूर्ण पर्व है हरियाली तीज।


Official Writer:- Atisha Agarwal

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